एक कुत्ते को एक मिली। वह उसे मुहं में दबाए एक पुल से गुजर रहा था तभी अपनी परछाई को देख कर वह भ्रम में पड़ गया कि पानी में दूसरा कुत्ता पानी में है। उसने सोचा क्यो ना उसकी भी रोटी हड़प ली जाए। इस चक्कर में उसने अपनी रोटी भी गंवा दी।
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यह कहानी तो सभी जानते हैं, लेकिन आगे की कहानी हमारे नए जनरेशन से जुड़ी है।
पप्पू पिल्ले को एक रोटी का टुकड़ा मिला। उसने सोचा क्यों न इसे ऐसी जगह चल कर खाया जाए जहा आस - पास कोई न हो। इस तरह मुझे अपनी रोटी अन्य पिल्लों के साथ बांटकर नहीं खानी पड़ेगी। उसे ख्याल आया इसके लिए छोटी पुलिया के पार की जगह ठीक रहेगी। खाने के बाद पानी भी पास ही मिल जाएगा, वही छांव में फिर आराम से सो जाऊँगा। यह सोच कर वह पुलिया पर कुछ दूर ही चला था कि पानी में उसे अपनी परछाई नजर आयी। उसने सोचा किसी तरह दूसरे पिल्ले की मुंह की रोटी छीन ली जाए तो मजे से पेट भर खाऊँगा।
पप्पू पिल्ले ने दुबारा पानी में झांका , फिर अपनी ताकत को आंका। वह पिल्ला भी पप्पू को अपनी तरह ही चुस्त-तंदुरुस्त ही दिखा। अब पप्पू पिल्ला चक्कर में पड़ गया कि कहीं उस पिल्ले से रोटी लेने गया और अपनी रोटी गंवा बैठा तो लेने के देने पड़ जायेंगे। पूरा पेट भरने के चक्कर में आधा पेट भी नहीं भर पाएगा। झट पप्पू पिल्ले ने दूसरे पिल्ले से रोटी छीनने का ख्याल दिमाग से झटका और पुलिया के उसपार चल पड़ा। वहां जाकर आराम से छांव में बैठ कर पप्पू दुम हिलाता हुआ अपनी रोटी खाने लगा।
कहानी का सार:-
अगली पीढ़ी भले ही बुद्धिमान ना भी हो तो उसे इतनी समझ जरुर है कि आपसी लड़ाई के चक्कर में सबकुछ गंवाने से अच्छा है कि अपने हिस्से का पाकर मस्त रहो।
- सोनी सिंह -

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