रविवार, 28 अप्रैल 2013

...और डर भाग गया

चिंकी  पहली कक्षा में पढ़ती थी। मोनू उसकी क्लास का सबसे शैतान बच्चा था। वह अकसर  चिंकी की चीजें छीन लिया करता था। वह बेचारी डर कर कभी उसका विरोध नहीं कर पाती थी। घर आकर चिंकी  अपनी 
मम्मी से इसकी शिकायत किया करती थी। माँ उसे समझाती कि चिंकी को मोनू से डरने की बजाए, उसकी गलत बातों का विरोध करना चाहिए। चिंकी अकसर 
सोचती कि वह आज मोनू को सबक सिखाएगी, किंतु उसके सामने पड़ते ही वह डरकर दुबक जाती थी। चिंकी सोचा करती कि मोनू बहुत ताकतवर है वह टीचर से भी नहीं डरता। इसलिए वह टीचर से भी मोनू की शिकायत नहीं किया करती थी।

एक दिन चिंकी के चाचा उससे मिलने आयें। उन्होंने चिंकी को एक सुंदर चांद - तारों वाला बॉक्स उपहार में दिया। दूसरे दिन चिंकी खुशी-खुशी नया पेंसिल बॉक्स लेकर स्कूल गयी और अपने दोस्तों को दिखने लगी। उसी समय मोनू की नजर चिंकी के पेंसिल बॉक्स पर पड़ी। उसने चिंकी को बुलाकर नया बॉक्स उसके हवाले कर देने को कहा। चिंकी झट अपना बॉक्स ले आई और उसने वह मोनू को दे दिया। मोनू बॉक्स उलट-पलट कर देखने लगा। अपना पसंदीदा बॉक्स जाते देख  चिंकी का मन बहुत उदास हो गया। उसे माँ की सीख याद आई " चिंकी डरना नहीं, डर से आंखें मिलाकर तेज से चिल्लाना डर भाग जाएगा।"

चिंकी ने वैसा ही किया जैसा माँ ने सिखाया था। चिंकी ने अपनी आंखें बंद की तेज से चिल्लाई - " चोर-चोर", उसी समय टीचर क्लास में आयीं। उन्होंने  चिंकी को चिल्लाते हुए सुना और उसके पास पहुंच गयीं। मारे डर के मोनू थर-थर कांपने लगा।
चिंकी की हंसी छूट गयी। वह जान गयी थी की मो  मोनू को भी डर  लगता है। टीचर ने मोनू को क्लास के बाहर कान पकड़ कर दिया  और चिंकी को उसका प्यारा बॉक्स वापस मिल गया। साथ ही उसे बड़ी सीख मिली और डर भाग गया।

- soni singh -

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