बुधवार, 29 मई 2013

...झूठा ही सही


झूठ बोलना एक ऐसी आदत है, जो बच्चों में अपने-आप विकसित हो जाती है।अकसर माता -पिता इसे लेकर परेशान भी रहते हैं कि यह  आदत कैसे सुधारी जाए। पर यदि आपका बच्चा ज्यादा झूठ नहीं बोलता तो उसकी यह आदत आपकी ख़ुशी की वजह होनी चाहिए।
टोरंटो विश्वविद्यालय की ओर से किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई कि यदि आपका बच्चा 2 साल की उम्र में झूठ बोलता है तो यह उसके तेज दिमाग की निशानी है। स्टडी के  अनुसार बच्चा जितनी सफाई से झूठ बोलता है वह बड़ा होकर उतना ही सफल व्यक्ति बनता है। यानी बच्चे का झूठ यह बताता है कि उसका दिमाग कितना विकसित है और अपनी गलतियों को छुपाने के लिए वह कितनी बेहतर कहानी गढ़ सकता है। 2 से 1 2 साल के बच्चों पर की गई इस स्टडी में यह बात सामने आई कि 3 साल के 4 0, 4 साल के 9 0 और 1 6 साल के 1 0 0 प्रतिशत बच्चे झूठ बोलते हैं।
हम सभी जन्म से ही झूठ बोलने कि कला में पारंगत होते हैं। हालांकि बहुत छोटे बच्चे झूठ बोलने में माहिर नहीं होते, लेकिन चार साल कि उम्र में जब उनकी कल्पनाशक्ति डेवलप हो रही  होती है तो ऐसे में वह सीख जाते हैं कि सफाई से कैसे झूठ बोला जाए।
स्कूल में अपनी इमेज बनाये रखने के लिए बच्चे झूठ बोलने कि आदत धीरे -धीरे छोड़ देते हैं , उन्हें डर होता है कि दोस्तों और टीचर कि नजर में कहीं वे झूठे ना बनकर रह जाएं। कहने का मतलब है कि अगर आपका बच्चा ज्यादा झूठ नहीं बोलता तो चिंता कि बात नहीं है, किंतु यदि वह बार-बार बेवजह झूठ बोलता है तो यह सीरियस प्रॉब्लम है और ऐसे में उसकी मदद कर उसे सही राह दिखाएं।


मनोविज्ञानी सीमा बताती हैं कि झूठ बोलने के पीछे बच्चों की कुछ कॉमन वजह होती है जैसे-
डर-बच्चे के झूठ बोलने के पीछे सबसे बड़ी वजह डर होता है। जिन बच्चों के स्कूल और घर में ज्यादा अनुशासन होता है, वहां बच्चे डांट और सजा से बचने के लिए ज्यादा झूठ बोलते हैं। 
आदत- शुरू में मस्ती-मज़ा के लिए झूठ बोलते-बोलते बच्चों को इसकी आदत पड़ जाती है फिर वे बेवजह बार-बार झूठ बोलने लगते हैं।
दूसरों की सीख- कई बार आस-पास किसी बड़े से भी बच्चे झूठ बोलना सीख जाते हैं।
अभिभावक क्या करें-
सबसे पहले तो बच्चें को झूठ बोलने के लिए सजा न दें। उससे झूठ बोलने की वजह बारे प्यार और धैर्य से सुनें, उसे प्यार से ही समझाने का प्रयास करें।
सच बोलने के लिए बच्चे को प्रोत्साहित करें। सच बोलने पर इनाम दें।
बच्चे को समझाएं कि अपने बड़ों और दोस्तों का विश्वास जीतने के लिए सच जरूरी है।
शुरू में ही बच्चे की झूठ बोलने की आदत को नजरअंदाज करने की बजाए उसकी परेशानी को समझने की कोशिश करें, कई बार बच्चे बड़ों का आकर्षन पाने के लिए झूठ बोलते हैं।
अपने भी सच बोलें, क्योंकि बच्चा जाने-अनजाने आपको ही कॉपी करता है।
बच्चे के झूठ बोलने की आदत के बारे में सबके सामने चर्चा कर उसे नीचा न दिखाएं, ना ही उसे झूठा नाम दें। 
यानी आपको बहुत धैर्य से इस मसले में काम लेना है और बच्चे पर नाराज़ होने की बजाए उसकी आदत को अपने प्यार और विश्वास से बदलना है।
-सोनी सिंह

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